तुम्हारी नज़रों में हम ने देखा

तुम्हारी नज़रों में हम ने देखा , अजब सी चाहत झलक रही हैं
तुम्हारे होठों की सुर्खियों से , वफ़ा की शबनम झलक रही हैं
तुम्हारी नज़रों में हम ने देखा , अजब सी चाहत झलक रही हैं
हमारी सांसों को छू के देखो-2 , तुम्हारी खुशबू महक रही है
तुम्हारी नज़रों ...

क़सम खुदा की यक़ीं करलो , कहीं भी ना होगा हुस्न ऐसा
न देखो ऐसे झुका के पलकें , हमारी नीयत बहक रही हैं

तुम्हारी नज़रों ...
अजब सी ...
तुम्हारी उल्फ़त में जानेजाना , हमें मिली थी जो एक धड़कन
हमारे सीने में आज तक वो , तुम्हारी धड़कन धड़क रही हैं
तुम्हारी नज़रों ...

अजब सी ...

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