जिसे देख मेरा दिल धडका मेरी जान तदाप्ती है
जिसे
देख मेरा दिल धडका मेरी जान तदाप्ती है
कोई जन्नत की वो हूर नही मेरे कॉलेज की एक लड़की है
ये मोरनी के जैसी चले इसकी अदाए कातिल बड़ी
निकले जिधर से खुश्बू उड़े कितनी हसी है ये गुल्छादी
निकले जिधर कुछ आज है होने वाला मेरी आंख फदक्ति है
कोई जन्नत की वो हूर...
मुझको ये मेरी लैला लगे इसपे लुटा दू मै ज़िन्दगी
जी चाहे इसके लैब चूम लू हस के चुरा लू इसकी हसी
इसे छू के मेरी सांसो मे कोई आग दहकती है
कोई जन्नत की वो हूर...
कोई जन्नत की वो हूर नही मेरे कॉलेज की एक लड़की है
ये मोरनी के जैसी चले इसकी अदाए कातिल बड़ी
निकले जिधर से खुश्बू उड़े कितनी हसी है ये गुल्छादी
निकले जिधर कुछ आज है होने वाला मेरी आंख फदक्ति है
कोई जन्नत की वो हूर...
मुझको ये मेरी लैला लगे इसपे लुटा दू मै ज़िन्दगी
जी चाहे इसके लैब चूम लू हस के चुरा लू इसकी हसी
इसे छू के मेरी सांसो मे कोई आग दहकती है
कोई जन्नत की वो हूर...
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