तुम्हे छेड़े हवा चंचल, शरारत तुमसे सीखी है

तुम्हे छेड़े हवा चंचल, शरारत तुमसे सीखी है
वो बैठा फूल पे भंवरा, मुहब्बत तुमसे सीखी है
मेरे गुलफाम सुन लो तुम दीवाने दिल का कहना है
किया है फैसला मैंने तुम्हारे बिन न रहना है
तुम्हे छेड़े हवा ...

करे दीवानगी मौसम सनम तुम्हारी इन अदाओ से
गज़ब लगाती हो तुम रब की कसम
भरोसा हो ना जो मेरा तो पूछो इन फिजाओ से
तुम्हे छेड़े हवा ...

बनाया आशियां मैने सनम तुम्हारी ही निगाहो मे
ना जाऊ दूर मै तुमसे कभी
बिता दू उम्र मै सारी सनम तेरी ही बाहो मे
तुम्हे छेड़े हवा ...

बनी है सुरमई देखो घटा तेरी आंखो के काजल से
चुराती है जवान कुश्बू हवा
लिपट के मेरी जान-इ-मन तेरे ही रेशमी आंचल से
तुम्हे छेड़े हवा ...

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