नजर के सामने जिगर के पास कोई रहता है वो हो तुम
नजर के सामने जिगर
के पास कोई रहता है वो हो तुम
बेताबी क्या होती है, पूछो मेरे दिल से
तनहा तनहा लोटा हूँ,
में तो भरी महफ़िल से
मर ना जाऊ कहीं होक
तुमसे जुदा
नजर के सामने जिगर
के पास कोई रहता है वो हो तुम
तन्हाई जीने ना दे, बेचेनी तडपाये
तुमको में ना देखूं
तो दिल मेरा घबराये
अब मुझे छोड़ के दूर
जाना नहीं
नजर के सामने जिगर
के पास कोई रहता है वो हो तुम
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