जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए
सानू : जब कोई बात बिगड़ जाए , जब कोई मुश्किल पड़ जाए तुम देना साथ मेरा , ओ , हमनवाज़ जब कोई बात बिगड़ जाए , जब कोई मुश्किल पड़ जाए ना कोई है , ना कोई था , ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा , ओ , हमनवाज़ सानू : (हो चाँदनी जब तक रात , देता है हर कोई साथ तुम मगर अन्धेरों में , ना छोड़ना मेरा हाथ ) \- २ जब कोई बात बिगड़ जाए ... ना कोई है , ना कोई था ... साधना : (वफ़ादारी की वो रस्में , निभाएँगे हम तो कसमें एक भी साँस ज़िन्दगी की , जब तक हो अपने बस में ) \- २ जब कोई बात बिगड़ जाए ... शानू : ना कोई है , ना कोई था ... सानू : दिल को मेरे हुआ यकीं , हम पहले भी मिले कहीं सिलसिला ये सदियों का , कोई आज की बात नहीं साधना: दिल को मेरे हुआ यकीं , हम पहले भी मिले कहीं , सिलसिला ये सदियों का , कोई आज की बात नहीं दोनो: जब कोई बात बिगड़ जाए , जब कोई मुश्किल पड़ जाए तुम देना साथ मेरा , ओ , हमनवाज़ , ना कोई है , ना कोई था , ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा , ओ , हमनवाज़ \- २