कभी जो भूलना चाहूं न जाने क्यूं मेरे दिलबर

कभी जो भूलना चाहूं न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे तुम याद आते हो ओ मुझे तुम याद आते हो
मुझे तुम याद आते ...

कभी सावन के मौसम में अगर गाए कहीं कोयल
किसी मेहंदी की टहनी पर न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे तुम याद आते ...

किसी के हाथ से छूटे अगर शीशे का पैमाना
छलक जाए अगर सागर न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे तुम याद आते ...

मुझे क्यूं याद आते हो


Comments

Popular posts from this blog

इस तरह आशिकी का असर छोड़ जाऊगा

दिल है कि मानता नहीं

चाँद से पर्दा कीजिये , कहीं चुरा ना ले चेहरे का नूर